आधुनिक राजस्थान का इतिहास | सहायक संधियाँ व अधीनस्थ संधियाँ

आधुनिक राजस्थान का इतिहास | सहायक संधियाँ व अधीनस्थ संधियाँ

सहायक संधियाँ व अधीनस्थ संधियाँ ईस्ट इंडिया कम्पनी की स्थापना और प्रारंभिक विजय अन्य युद्ध इलाहाबाद संधि के बाद ईस्ट इंडिया कम्पनी भारत में पूर्णतः राजनीतिक शक्ति के रूप में स्थापित हुई। बंगाल की अर्थव्यवस्था और कम्पनी का हस्तक्षेप रेग्युलेटिंग एक्ट 1773 और घेरे की नीति (Ring Fence Policy) राजस्थान सहायक संधियाँ व अधीनस्थ संधियाँ … Read more

1857 की क्रांति में सलूम्बर और कोठारिया का योगदान

1857 की क्रांति में सलूम्बर और कोठारिया का योगदान

1857 की क्रांति में सलूम्बर और कोठारिया आउवा (जोधपुर) के ठाकुर कुशालसिंह से प्रेरणा लेकर मेवाड़ के दो प्रमुख सामन्तों सलूम्बर के रावत केसरीसिंह और कोठारिया के रावत जोधसिंह, का 1857 ई. के स्वतंत्रता संग्राम में अपूर्व योगदान रहा है। यह सही है कि मारवाड़ के सामन्तों की भांति मेवाड़ के सामन्तों ने खुलकर क्रांति … Read more

1857 की क्रांति में कोटा का योगदान – कारण, घटनाएं और ऐतिहासिक विश्लेषण

1857 की क्रांति में कोटा का योगदान

1857 की क्रांति में कोटा विषय विवरण स्थान कोटा (राजस्थान) क्रांति का आरंभ 15 अक्तूबर 1857 ई. मुख्य कारण ब्रिटिश हुकूमत की दमनकारी नीतियाँ, अंग्रेज़ अधिकारियों का हस्तक्षेप, सैनिकों और प्रजाजनों में असंतोष नेतृत्व कोटा की सेना और प्रजाजन विशेष घटना 15 अक्तूबर 1857 को कोटा की सेना और जनता ने मिलकर कोटा रेजीडेंसी (Residency) … Read more

मेवाड़ में 1857 की क्रांति – एक वीरता और स्वाभिमान की गाथा

मेवाड़ में 1857 की क्रांति – एक वीरता और स्वाभिमान की गाथा

मेवाड़ में 1857 की क्रांति 1857 ई. की क्रांति के समय मेवाड़ की जनता में भी अंग्रेजों के विरुद्ध काफी रोष था। मेवाड़ के अधिकांश सामंत ब्रिटिश शासन के खिलाफ थे। क्योंकि अंग्रेजों ने सामंतों के अधिकारों को छीन लिया। नसीराबाद बाद में हुई क्रांति की सूचना मेवाड़ उदयपुर पहुंच चुकी थी। सूचना मिलने पर … Read more

1857 की क्रांति में आऊवा और एरिनपुरा का विद्रोह: राजस्थान के रणबांकुरों की गाथा

1857 की क्रांति में आऊवा और एरिनपुरा का विद्रोह

1857 की क्रांति में आऊवा और एरिनपुरा 1857 का विद्रोह पूरे भारत में अंग्रेजी शासन के खिलाफ जनआक्रोश का प्रतीक बना। जहाँ अधिकांश राजस्थानी रियासतें ब्रिटिशों के साथ रहीं, वहीं कुछ क्षेत्रों ने वीरता और स्वतंत्रता की लौ को जलाए रखा।राजस्थान के आऊवा (Pali, मारवाड़) और एरिनपुरा (Sirohi) ऐसे दो महत्वपूर्ण केंद्र थे जहाँ से … Read more