प्रजामंडल आंदोलन : इतिहास, चरण, उद्देश्य और महत्व (1927–1948)

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प्रजामंडल आंदोलन की परिभाषा

रियासतों की जनता में राजनीतिक जागृति उत्पन्न करने के लिए जिन संगठनों की स्थापना हुई, उन्हें प्रजामंडल कहा गया।

इनके मुख्य उद्देश्य थे –
① रियासतों में राजनीतिक चेतना जगाना।
② उत्तरदायी (लोकप्रिय) सरकार की स्थापना के प्रयास करना।

डॉ. एम.एस. छैना के अनुसार प्रजामंडल का कालक्रम:

  • प्रथम चरण : 1927 ई. से पूर्व
  • द्वितीय चरण : 1927 – 1938
  • तृतीय चरण : 1938 से पश्चात

प्रजामंडल आंदोलन – प्रथम चरण (1927 ई. से पूर्व)

प्रमुख संस्थाएँ और संगठन

1. वर्धमान विद्यालय (1907)

  • संस्थापक : उमादत्तलाल सेठ, जयपुर में।
  • उद्देश्य : विभिन्न विषयों के अध्ययन के साथ छात्रों में राष्ट्रीय भावना का संचार करना।
  • हावर्ड बम कांड की रूपरेखा यहीं तैयार की गई थी।

2. वीर भारत सभा (1910)

  • संस्थापक : कैलाशचंद्र बारहठ
  • यह संगठन आधुनिक भारत की ज्वालामुखी शाखा के रूप में कार्य करता था।

3. सर्वहितकारी सभा (1907, बीकानेर)

  • संस्थापक : कन्हैयालाल दूँद और स्वामी गोपालदास
  • उद्देश्य :
    • लड़कियों की शिक्षा के लिए टूनी पाठशाला का गठन।
    • अछूतों की शिक्षा के लिए कबीर पाठशाला की स्थापना।

इस प्रकार, इन प्रारंभिक संस्थाओं ने राजस्थान की जनता में राजनीतिक और सामाजिक चेतना पैदा करने का कार्य किया, जिसने आगे चलकर प्रजामंडल आंदोलन को जन्म दिया।

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राजस्थान के प्रमुख संगठन और प्रजामंडल आंदोलन

1. राजस्थान सेवा संघ (1919)

  • स्थापना : 1919 ई., वर्धा (महाराष्ट्र)
  • संस्थापक : उमादत्तलाल सेठी, विजयसिंह पथिक, रामनारायण चौधरी, हरिभाऊ उपाध्याय, हरिभाई किंकर।
  • अध्यक्ष : विजयसिंह पथिक
  • मंत्री : रामनारायण चौधरी
  • प्रकाशन कार्य : राजस्थान केसरी (मुख्य संपादक – विजयसिंह पथिक) → वर्धा से।
  • 1920 – कार्यालय अजमेर स्थानांतरित किया गया।
  • बाद में नवीन राजस्थान निकाला गया।
  • 1923 – नवीन राजस्थान का नाम बदलकर तरुण राजस्थान कर दिया गया।
  • संपादक – रामनारायण चौधरी
  • गांधीजी के परामर्श पर वर्धा में स्थापित किया गया।
  • 1920 ई. → इसका मुख्यालय अजमेर स्थानांतरित किया गया।
  • उद्देश्य : रियासती आंदोलनों को गति प्रदान करना।
  • शाखाएँ : जयपुर, कोटा, जोधपुर, बूंदी।
  • तरुण राजस्थान में रियासतों की समस्याओं का उल्लेख।
  • 1928 के बाद यह संघ मुख्यतः निष्क्रिय हो गया।
  • प्रकाशन कार्य : राजस्थान केसरी (मुख्य संपादक – विजयसिंह पथिक) → वर्धा से।
  • 1920 – कार्यालय अजमेर स्थानांतरित किया गया।
  • बाद में नवीन राजस्थान निकाला गया।
  • 1923 – नवीन राजस्थान का नाम बदलकर तरुण राजस्थान कर दिया गया।
  • संपादक – रामनारायण चौधरी

2. राजपूताना मध्य भारत सभा (1918)

  • स्थापना का उद्देश्य : रियासतों में राजनीतिक चेतना जाग्रत करना।
  • संस्थापक : विजयसिंह पथिक, रामनारायण चौधरी, सेठ जमनालाल बजाज (अध्यक्ष) आदि।
  • प्रथम अधिवेशन : दिल्ली → अध्यक्षता जमनालाल बजाज।
  • संगठन में शामिल : राजस्थान व मध्य भारत के विद्यार्थी, पत्रकार, समाजसेवी।
  • स्थापना : 1918, दिल्ली
  • प्रधान कार्यालय : कानपुर
  • संस्थापक : गणेश शंकर विद्यार्थी, जमनालाल बजाज, विजयसिंह पथिक, चाँदकरण शारदा आदि।
  • राजस्थान में क्षेत्रीय कार्यालय : अजमेर
  • प्रमुख अधिवेशन :
  • 1920, अजमेर → अध्यक्षता जमनालाल बजाज।
  • 1921, नागपुर → राजस्थान के किसानों की दयनीय दशा से संबंधित प्रदर्शनी लगाई गई।

3. मारवाड़ सेवा संघ (1920)

  • स्थापना : 1920 ई., जोधपुर
  • संस्थापक : दुर्गाबक्शी।
  • प्रथम राजनीतिक संगठन : जोधपुर राज्य का।
  • अध्यक्ष : दुर्गाबक्शी।
  • मंत्री : न्यायराज भंडारी।

ये सभी संगठन राजस्थान की रियासतों में प्रजामंडल आंदोलन और लोकतांत्रिक चेतना के लिए नींव का काम करते हैं।

प्रजामंडल आंदोलन – द्वितीय चरण (1927–1938 ई.)

मारवाड़ हितकारिणी सभा (1923)

  • स्थापना : 1923, जयचंद सुखवाल द्वारा।
  • प्रारंभिक प्रयास 1918 में हुए थे, परंतु सक्रियता 1923 में आई।
  • उद्देश्य : दुग्ध और पशुओं के निर्यात की रोकथाम के लिए आंदोलन।

अखिल भारतीय देशी राज्य लोक परिषद (1927)

  • स्थापना : 1927, बम्बई
  • प्रथम अधिवेशन : 17–18 दिसम्बर 1927, बम्बई
  • अध्यक्ष : दीवान बहादुर संपत राव
  • उपाध्यक्ष : विजयसिंह पथिक
  • मंत्री (मध्य भारत) : पं. रामनारायण चौधरी

अधिवेशन में शामिल प्रमुख व्यक्ति

  • जोधपुर → कन्हैयालाल कल्ला
  • बीकानेर → रामदेव पूनियार
  • कोटा → त्रिलोकचंद्र मथुर

बाद का अधिवेशन

  • दिसम्बर 1945 – जनवरी 1946 : उदयपुर में अधिवेशन आयोजित।

यह चरण प्रजामंडल आंदोलन को अखिल भारतीय स्तर पर जोड़ता है।
अब राजस्थान के नेता केवल स्थानीय आंदोलनों तक सीमित नहीं रहे बल्कि पूरे देश की रियासतों के आंदोलनों से जुड़ने लगे।

प्रजामंडल आंदोलन – तृतीय चरण (1938 ई. के पश्चात्)

कांग्रेस का हरिपुरा अधिवेशन (1938)

  • 1938 ई. – कांग्रेस के हरिपुरा अधिवेशन में यह प्रस्ताव पारित हुआ कि कांग्रेस ब्रिटिश भारत के साथ-साथ रियासती भारत के राजनीतिक आंदोलनों अर्थात प्रजामंडल आंदोलनों को भी सहयोग और समर्थन देगी।
  • राष्ट्रीय कांग्रेस के हरिपुरा अधिवेशन (1938) की अध्यक्षता सुभाषचन्द्र बोस ने की।
  • इस अधिवेशन में यह निर्णय लिया गया कि –
    • सभी रियासतों में प्रजामंडल की स्थापना की जाएगी।
    • हर रियासत में उत्तरदायी शासन की मांग को लेकर आंदोलन चलाए जाएंगे।

प्रजामंडल आंदोलन की विशेषताएँ

  • 1938 ई. के बाद सभी रियासतों में प्रजामंडल आंदोलन सक्रिय हो गए।
  • इन आंदोलनों में किसानों, व्यापारियों और विद्यार्थियों की भागीदारी रही।
  • आंदोलन का मुख्य उद्देश्य → लोकप्रिय सरकार की स्थापना करना था।
  • प्रजामंडल आंदोलन की भूमिका भारत की स्वतंत्रता की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण रही।

प्रमुख घटनाएँ

  • 1948 ई., जयपुर अधिवेशन
    • अध्यक्षता – पं. जवाहरलाल नेहरू।
    • अध्यक्ष – पं. हरीश सीतारमैया।
    • इस अधिवेशन में अनेक संगठनों का विलय कर उन्हें इंडियन नेशनल कांग्रेस में मिला दिया गया।
  • धर्मस्थल (लाल घाटीधार) घटना
    • चंद्रमल बड़गुजर और स्वामी गोपालदास ने यहाँ तिरंगा झंडा फहराया

1938 ई. के बाद का प्रजामंडल आंदोलन राजस्थान की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक चेतना का आधार बना।
इसने भारत छोड़ो आंदोलन और बाद में संयुक्त राजस्थान आंदोलन को मजबूत आधार दिया।

Quick Revision Box (प्रजामंडल आंदोलन)

  • प्रथम चरण (1927 से पूर्व) → स्थानीय संगठन बने (वर्धमान विद्यालय, वीर भारत सभा, सर्वहितकारी सभा, राजस्थान सेवा संघ, राजपूताना मध्य भारत सभा, मारवाड़ सेवा संघ, मारवाड़ हितकारीणी सभा)।
  • द्वितीय चरण (1927–1938) → अखिल भारतीय देशी राज्य लोक परिषद (1927, बम्बई) का गठन, अखिल भारतीय स्तर पर जुड़ाव।
  • तृतीय चरण (1938 के बाद) → हरिपुरा अधिवेशन (सुभाषचन्द्र बोस), 1948 जयपुर अधिवेशन (जवाहरलाल नेहरू), प्रजामंडलों का कांग्रेस में विलय।
  • उद्देश्य → रियासतों में उत्तरदायी शासन और लोकतांत्रिक चेतना।
  • महत्व → राजस्थान की जनता को स्वतंत्रता संग्राम से जोड़ने में निर्णायक भूमिका।

प्रजामंडल आंदोलन – Timeline Table

चरण / वर्षप्रमुख घटनाएँ और संगठनमुख्य व्यक्ति
प्रथम चरण (1927 ई. से पूर्व)वर्धमान विद्यालय (1907, जयपुर) → उमादत्तलाल सेठी वीर भारत सभा (1910) → कैलाशचंद्र बारहठ सर्वहितकारी सभा (1907, बीकानेर) → कन्हैयालाल दूँद, स्वामी गोपालदास राजस्थान सेवा संघ (1919) → विजयसिंह पथिक, रामनारायण चौधरी, जमनालाल बजाज राजपूताना मध्य भारत सभा (1918) → गणेश शंकर विद्यार्थी, जमनालाल बजाज मारवाड़ सेवा संघ (1920, जोधपुर) → दुर्गाबक्शी, न्यायराज भंडारी मारवाड़ हितकारीणी सभा (1923) → जयचंद सुखवालविजयसिंह पथिक, रामनारायण चौधरी, जमनालाल बजाज, उमादत्तलाल सेठी
द्वितीय चरण (1927–1938)अखिल भारतीय देशी राज्य लोक परिषद (1927, बम्बई) प्रथम अधिवेशन (17–18 दिसम्बर 1927, बम्बई) → अध्यक्ष : दीवान बहादुर संपत राव, उपाध्यक्ष : विजयसिंह पथिक, मंत्री : पं. रामनारायण चौधरी प्रतिनिधि – जोधपुर : कन्हैयालाल कल्ला, बीकानेर : रामदेव पूनियार, कोटा : त्रिलोकचंद्र मथुर उदयपुर अधिवेशन (दिसम्बर 1945–जनवरी 1946)विजयसिंह पथिक, कन्हैयालाल कल्ला, रामदेव पूनियार, त्रिलोकचंद्र मथुर
तृतीय चरण (1938 ई. के पश्चात्)हरिपुरा अधिवेशन (1938) → अध्यक्षता : सुभाषचन्द्र बोस, निर्णय : सभी रियासतों में प्रजामंडल की स्थापना 1948 जयपुर अधिवेशन → अध्यक्षता : जवाहरलाल नेहरू, अध्यक्ष : हरीश सीतारमैया, निर्णय : प्रजामंडलों का विलय कांग्रेस में धर्मस्थल (लाल घाटीधार) घटना → चंद्रमल बड़गुजर और स्वामी गोपालदास ने तिरंगा फहरायासुभाषचन्द्र बोस, जवाहरलाल नेहरू, हरीश सीतारमैया, चंद्रमल बड़गुजर, स्वामी गोपालदास

प्रजामंडल आंदोलन – FAQ Section

Q1. प्रजामंडल आंदोलन क्या था?

Ans. रियासतों में राजनीतिक जागृति उत्पन्न करने और उत्तरदायी (लोकप्रिय) सरकार की स्थापना के लिए बने संगठनों को प्रजामंडल आंदोलन कहा गया।

Q2. प्रजामंडल आंदोलन का उद्देश्य क्या था?

Ans.

  1. रियासतों में राजनीतिक चेतना पैदा करना।
  2. जनता के अधिकारों की रक्षा करना।
  3. उत्तरदायी सरकार की स्थापना करना।
Q3. प्रजामंडल आंदोलन का कालक्रम किसके अनुसार बताया गया है?

Ans. डॉ. एम.एस. छैना के अनुसार –

  • प्रथम चरण : 1927 ई. से पूर्व
  • द्वितीय चरण : 1927–1938 ई.
  • तृतीय चरण : 1938 ई. के पश्चात्
Q4. प्रजामंडल आंदोलन का प्रथम चरण किन संगठनों से जुड़ा है?

Ans.

  • वर्धमान विद्यालय (1907) – उमादत्तलाल सेठी
  • वीर भारत सभा (1910) – कैलाशचंद्र बारहठ
  • सर्वहितकारी सभा (1907, बीकानेर) – कन्हैयालाल दूँद, स्वामी गोपालदास
  • राजस्थान सेवा संघ (1919) – विजयसिंह पथिक, रामनारायण चौधरी
  • राजपूताना मध्य भारत सभा (1918) – जमनालाल बजाज, विजयसिंह पथिक
  • मारवाड़ सेवा संघ (1920) – दुर्गाबक्शी
  • मारवाड़ हितकारीणी सभा (1923) – जयचंद सुखवाल
Q5. अखिल भारतीय देशी राज्य लोक परिषद कब बनी और कहाँ?

Ans. यह परिषद 1927 ई. में बम्बई में बनी।

  • अध्यक्ष : दीवान बहादुर संपतराव
  • उपाध्यक्ष : विजयसिंह पथिक
  • मंत्री : पं. रामनारायण चौधरी
Q6. प्रजामंडल आंदोलन का तृतीय चरण कब और किस अधिवेशन से जुड़ा है?

Ans.

  • 1938 के हरिपुरा अधिवेशन (सुभाषचन्द्र बोस की अध्यक्षता) से।
  • इसमें सभी रियासतों में प्रजामंडलों की स्थापना का निर्णय हुआ।
Q7. 1948 का जयपुर अधिवेशन किसके नेतृत्व में हुआ?

Ans.

  • अध्यक्षता : पं. जवाहरलाल नेहरू
  • अध्यक्ष : पं. हरीश सीतारमैया
  • इसमें सभी प्रजामंडलों का भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में विलय कर दिया गया।
Q8. धर्मस्थल (लाल घाटीधार) की घटना क्या थी?

Ans. चंद्रमल बड़गुजर और स्वामी गोपालदास ने यहाँ तिरंगा झंडा फहराया। यह रियासतों में राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक बना।

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